मूवी रिव्यू: समुद्री युद्ध का रोमांच ‘द गाजी अटैक’

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हम सब जानते हैं कि बंटवारे के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच तीन युद्ध हुये, अगर कारगिल को भी गिन लिया जाये तो चार, लेकिन एक युद्ध और भी हुआ था जिससे आम जनता वाकिफ नहीं। दरअसल पाकिस्तान और ईस्ट पाकिस्तान के बंग्लादेश बनने के समय भारत पाकिस्तान के बीच एक युद्ध समुद्र में भी हुआ था। उस युद्ध में भी भारतीय नेवी जवानो ने अपनी जिन्दादिली और देश के प्रति अपनी गहरी आस्था के तहत जीता था। इस रोमांचक फिल्म ‘द गाजी अटैक’ के निर्देशक  संकल्प रेडडी हैं।the gazi attack

भारतीय नेवी में कैप्टन रनविजय सिंह यानि के के मेनन देश के लिये मर मिटने वाले जवानो में से एक हैं। दुश्मन अगर सामने है तो वह उससे लड़ने के लिये किसी परमिशन का इंतजार तक नहीं कर पाते। पता चलता है कि पाकिस्तान समुद्र के रास्ते  अपनी जंगी पनडुब्बी गाजी के द्धारा हमारे बंदरगाहों पर हमला करने वाला है। उस पनडुब्बी का कैप्टन राहुल सिंह बहुत ही काबिल नेवल ऑफिसर माना जाता है। उसका मुकाबला करने के लिये भारतीय कमांड के ऑफिसर ओमपुरी और नस्सर, रनविजय सिंह को नियुक्त करते हैं लेकिन उनके साथ लेफ्टिनेंट कमांडर अर्जन वर्मा यानि राणा डग्गूबती को भी नियुक्त करते हैं और ताकीद करते हैं कि हमें पहले हमला नहीं करना है अगर रनविजय सिंह ऐसा करते हैं तो उन्हें रोकने के लिये अर्जुन वर्मा को विशेष अधिकार दिये जाते हैं। पनडुब्बी में अर्जुन वर्मा से सीनियर एक एग्जीक्यूटिव अधिकारी देवराज यानि अतुल कुलकर्णी भी तैनात हैं। समुद्र के नीचे पाकिस्तान और इंडिया के बीच चोर पुलिस का खेल शुरू हो जाता है । जिसके तहत पाकिस्तानी कैप्टन, इंडियन कैप्टन की हर चाल फेल करते हुये उनकी पनडुब्बी को क्षतिग्रस्त कर देता है। इस बीच रनविजय सिंंह अर्जन वर्मा की जान बचाते हुये वीरगति को प्राप्त होते है। बाद में इस बारे में देवराज अर्जुन को बताते हैं कि भारतीय नेवी में रनविजय जैसे ऑफिसर बहुत कम हैं इससे पहले उनका बेटा वीरगति को प्राप्त हो चुका था, यहां भी उन्होंने तुम्हारी जान बचाने के लिये अपनी जान दे दी । उसके बाद अर्जन वर्मा अपनी पनडुब्बी के क्षतिग्रस्त होने व अपने क्रू में कितने ही जवानों के घायल होने के बाद भी अपने कैप्टन को श्रद्धांजलि देने के लिये दुश्मन को नेस्तनाबूद करने का निश्चय करता है।  बाद में अपनी सूझबूझ व अपने साथियों की दिलेरी के चलते गाज़ी को डुबोने में सफल होता है ।Kay-Kay-Menon-The-Ghazi-Attack

गाजी अटैक बेशक एक कन्फयून भरा टाइटल होने के बाद एक अत्यंत रोमांचक रौंगटे खड़े कर देने वाली वाली थ्रिलर फिल्म है। समुद्र में बड़ी मछलियों की तरह विचरती और अपने दुश्मन पर घात लगाती पनडुब्बियों के तहत दर्शक समुद्री लड़ाई देख बार बार हैरानी भरी सिसकारियां लेता रहता है। खासकर भारतीय पनडुब्बी को क्षतिग्रस्त करने के बाद पाकिस्तानी कैप्टन का तारपिडो छौड़ उसे पूरी तरह खत्म करने का प्रयास और भारतीय पनडुब्बी का हर बार बाल बाल बच जाना। इस बीच रनविजय सिंह और अर्जुन वर्मा की नौकझौंक काफी इंप्रेसिव रही। उसके बाद किस प्रकार अर्जुन वर्मा पाकिस्तानी पनडुब्बी को नेस्तनाबूद करने में सफल होता है। समुद्र में हमले के दृश्य बेहद रोमांचक है । जहां भारतीय पनडुब्बी का सेट कमाल का है वहीं पाकिस्तानी पनडुब्बी के सेट पर उतनी मेहनत नहीं की गई। फिल्म उस यादगार समु्रदी युद्ध को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से पेश करती है।Taapsee-Pannu-The-Ghazi-Attack

फिल्म के किरदारों की बात की जाये तो  जंहा देश के प्रति एक जुनूनी ऑफिसर की भूमिका में के के मेनन अपनी अदाकारी का बढि़या प्रदर्शन करते हैं वहीं उनके जूनियर के तौर पर राणा डग्गूबती का अभियन देखने लायक रहा। अतुल कुलकर्णी ने एग्जीक्यूटिव ऑफिसर की भूमिका में जैसे घुसकर काम किया है। बंगाली शरणार्थी की छोटी सी भूमिका में तापसी पन्नू प्रभावित करती है। इनके अलावा ओमपुरी,नस्सर, मिलिन्द गुणाजी तथा बिक्रमजीत पाल आदि भी अच्छे सहयोगी साबित हुये, लेकिन पाकिस्तानी नेवी कैप्टन की भूमिका में राहुल सिंह ने अविस्मरणीय अभिनय किया है ।

 गाजी अटैक बेहतरीन अभिनय और जबरदस्त रोमांच के लिये देखी जाने वाली बेहतरीन फिल्म है।

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