मूवी रिव्यू: प्रभावहीन रही ‘सरकार 3’

रेटिंग**

बेशक राम गोपाल वर्मा प्रतिभाशाली फिल्म मेकर हैं लेकिन एक अरसे से वे समय से अपने आपको नहीं जोड़ पा रहे हैं। उनकी फिल्मों में भारी दौहराव दिखाई देता है  ‘सरकार 3’ भी इस दौहराव में बुरी तरह घिरी हुई दिखाई दी यानि इसमें कुछ भी नया नहीं  क्योंकि बहुत सारे ऐसे किरदार इस सीरीज में दर्शक पहले भी देख चूके हैं ।

अमिताभ बच्चन यानि सुभाष नागरे के दोनों बेटे मर चुके हैं लेकिन आज भी शहर की कमान उन्हीं के हाथों में है चीफ मीनिस्टर पूरी तरह से सरकार के प्रभाव में है, इसीलिये उनके गोकुल यानि रोनित रॉय और रमण दो मजबूत बॉडीगार्डो की भी ताकत बढ़ी है । बाहर की बात की जाये सरकार का सबसे बड़ा विरोधी नेता अरविंद देशपांडे यानि मनोज बाजपेयी तथा कुछ अन्य ताकतवर लोग सरकार की हस्ती मिटाने के लिये बेताब हैं। उसी दौरान सरकार का पोता शिवाजी यानि अमित साद भी जब सरकार के साथ आ जाता है तो कुछ समीकरण तेजी से बदलते हैं। इनके अलावा यामी गौतम अपने बाप की मौत का बदला सरकार से लेना चाहती है इसलिये वो अपना हथियार शिवाजी को बनाती है । इन सब के ऊपर दुबई बैठा डॉन जैकी श्रॉफ है । इसके बाद शुरू होता है शह और मात का खेल। अंत में सरकार एक बार फिर अपने सभी दुश्मनों का सफाया करने में कामयाब होते हैं ।एक अरसे से रामू समय के साथ चलते तो हैं लेकिन जल्दी ही वे हांफने लगते हैं और पिछड़ जाते हैं । इस बार लगा था ‘सरकार 3’ उन्हें दौड़ में शामिल करवा देगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। रामू एक बार फिर पीछे रह गये । फिल्म देखने के बाद लगता है कि  समय के साथ रामू अपने आपको बदल नहीं पा रहे हैं या बदलना नहीं चाहते। उनकी फिल्मों का बुरा हश्र देखते हुये धीरे धीरे एक प्रतिभाशाली मेकर को खत्म होता देख कर बुरा होता है । फिल्म में महज कुछ नये कलाकारों को शामिल कर रामू ने सोच लिया कि उनकी फिल्म फ्रैश हो गई लेकिन उन्होंने अपने पुराने किरदारों को सिर्फ नया मखौटा भर पहना दिया। ये सारे किरदार हमेशा की तरह सरकार के इर्द गिर्द घूमते रहते हैं ।फिल्म का बैकग्राउंड म्युजिक पहले की तरह अच्छा है जो इस बार भी फिल्म का मजबूत पक्ष साबित हुआ है।ये कोई कहने की बात नहीं कि इस बार भी पूरी फिल्म अमिताभ बच्चन के कंधों पर टिकी दिखाई दी जिसे उन्होंने मजबूती से अंत तक संभाले भी रखा। हालांकि मनोज बाजपेयी,रोहिणी हटगंडी,रोनित रॉय आदि कलाकार उन्हें अपनी बढि़या अदायगी से सहारा देते रहे। इसके अलावा अमित साद ने अमिताभ के सामने पूरे आत्मविश्वास से काम किया और अच्छा काम किया। यामी गौतम ने अपनी ग्रे भूमिका में नकारात्मक भाव भंगिमाओं से जान डालने की पूरी कोशिश की  लेकिन जैकी श्रॉफ को लगभग तमाशा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई।

दौहराव के बाद भी ‘सरकार 3’ अदाकारों के अच्छे अभिनय के लिये देखी जा सकती है ।

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