मूवी रिव्यू: ढोंगी बाबा का मायाजाल है – ‘ग्लोबल बाबा’

रेटिंग***

अभी तक धार्मिकता को लेकर कई फिल्में बन चुकी हैं जिनमें कुछ अच्छी भी थी। उन्हीं अच्छी फिल्मों में शामिल होने जा रही है निर्देशक मनोज तिवारी की फिल्म ‘ग्लोबल बाबा’।

कहानी

फिल्म में धार्मिक आस्था के तहत लोगों को ठगते हुये एक क्रिमिनल (अभिमन्यु सिंह) एक साधारण क्रिमिनल पंकज त्रिपाठी के सहयोग से ग्लोबल बाबा के रूप में इस कदर ताकतवर बन जाता है कि उसके आगे प्रशासन और पुलिस तथा नेता गण भी मौन हो कर रह जाते हैं। यहां तक ईमानदार सोशल वर्कर पंडित संजय मिश्रा पर आस्था रखने वाले लोग भी ग्लोबल बाबा की शरण में चले जाते हैं। आईपीएस अधिकारी रवि किशन ग्लोबल बाबा को पहचानने के बाद भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाते। यहां तक राज्य का गृह मंत्री अखिलेन्द्र मिश्रा भी बाबा के चरणों में झुकने के लिये मजबूर है। एक चैनल पत्रकार संदीपा धर बाबा के बारे में जानने के लिये उसके निजी चैनल में काम करने लगती है लेकिन उसे भी बाबा के चक्कर में मौत को गले लगाना पड़ता है। अंत में बाबा का सहयोगी पंकज त्रिपाठी ही बाबा की जन्म कुडंली रविकिशन को देते हुये उसकी पोल खोलने का इंतजाम करता है।

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निर्देशन

फिल्म की यूएसपी है बढ़िया स्क्रिप्ट जिसे डायरेक्टर मनोज तिवारी ने अनुभवी ढंग से हैंडल किया है। लिहाजा फिल्म का हर किरदार प्रभावशाली बन पड़ा है। बाबा के तंत्र मंत्र के जाल को पूरे विस्तार से फिल्म में दिखाया गया है जिसे देख दर्शक सोचने पर विवश हो जाता है। लोकेशन तथा सेट कहानी को और मजबूत बनाते हैं। पटकथा इस कदर कसी हुई है कि निर्देशक ने एक जगह भी फिल्म से अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी लिहाजा दर्शक शुरू से आखिर तक फिल्म के साथ जुड़ा रहता है।

अभिनय

फिल्म की एक और हाईलाईट है कास्टिंग। पहले क्रिमिनल और फिर ग्लोबल बाबा के किरदार में पूरी तरह घुस कर अभिमन्यु सिंह ने उसे शानदार अभिव्यक्ति दी है। इसके बाद पंकज त्रिपाठी ने बहुत ही प्रभावशाली अभिनय किया है। संजय मिश्रा को ज्यादा स्पेस नहीं मिल पाया बावजूद इसके वे जब भी दिखाई देते हैं अभिनय कर ही जाते हैं। अखिलेन्द्र मिश्रा इतनी बार नेता बन चुके हैं कि अब तो इस भूमिका को निभाने के आदि हो चुके हैं। संदीपा धर ने भी अपनी भूमिका को पूरे आत्मविश्वास से निभाया है। रवि किशन एक बेहतरीन कलाकार हैं उन्होंने आईपीएस अधिकारी के किरदार को सहज तरीके से निभाया है।

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संगीत

फिल्म में जितने भी गाने हैं वे कहानी के साथ चलते हुये उसे और प्रभावशाली बनाते हैं।

क्यों देखें

वैसे तो आज हर कोई इन ढोंगी बाबाओं के बारे में जानता हैं। उन्हें ये भी पता हैं कि अपने कृत्यों द्वारा कितने ही बाबा तो आजकल जेल में धूनी रमाये हुये है फिर भी इनके माया जाल के बारे में और समझना है तो एक बार फिल्म जरूर देखें।

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