INTERVIEW!! फिल्म जगत में आने से पूर्व एक अच्छा दर्जी भी रहा हूं – ऐ.के. हंगल

मायापुरी अंक, 56, 1975

‘नमक हराम’ ‘आईना’ ‘दीवार’ तथा आंधी जैसी सफल फिल्मों में प्रभावशाली चरित्र अभिनय की भूमिकाएं निभाने वाले आज के सुप्रसिद्ध चरित्र अभिनेता ए.के. (अवतार कृष्ण) हंगल से एक संक्षिप्त  भेंटवार्ता करने का सौभाग्य मुझे अभी कुछ समय पूर्व, उस समय मिला, जब वह लखनऊ में उत्तर प्रदेश फिल्म पत्रकार संघ के वार्षिक पुरस्कार समारोह में फिल्म अनुभव में अपने अद्वितीय अभिनेता के लिए पुरस्कार प्राप्त करने पधारे। चुस्त पेंट तथा कमीज में उनको देखकर यह नही कहा जा सकता कि वह अभी जवान नही है। और इस बात का राज़ बताते हुए स्वंय उन्होंने कहा कि मैं फिल्म जगत में आने से पूर्व एक अच्छा दर्जी भी रहा हूं।

स्टेज से फिल्मों में

चूंकि रंगमंच से ए.के. हंगल का लगभग 30 वर्षो का संबंध रहा है, इसलिए मैंने सर्वप्रथम स्टेज के अनुभव से संबधित कोई संस्मरण सुनाने को कहा। उन्होंने बताया कि जब मैं अपनी संस्था इफ्टा के लिए मुंबई में ड्रामें आदि करता फिरता था तो संजीव कुमार जो उस समय लगभग 20 साल का थ मेरे पास आया और ड्रामें में कोई भूमिका देने के लिए कहा तब मैंने उसे एक बूढ़े आदमी का रोल दिया, जो कि उसने बड़ी खूबी से किया और लोगों को पसंद आया। बाद में एक्टर बनने के बाद एक बार संजीव कुमार ने जब मुझ से पूछा आपने उस समय मुझे हीरो के रोल के बजाय बूढ़े आदमी का रोल क्यों दिया था?

तब मैंने मुस्कार कर जवाब दिया अगर मैं उस समय तुम्हें हीरो का रोल दे दिया होता तो आज तुम एक्टर नही बन पाते, हीरो ही बने रहते। इसी प्रकार जब बासु चैटर्जी की फिल्म ‘अनुभव’ में संजीव कुमार के साथ मैंने उसके नौकर की भूमिका की तो एक नौकर की भूमिका तो एक सीन में जब मैं उसे (मालिक को) उसका कोट पहनाने लगा तो वह बोला यह काम तो वास्तव में मुझे करना चाहिए था। तब मैंने भई यह तो एक्टिंग है वास्तविकता नही है। लगभग पचास वर्ष की उम्र में ए.के.हंगल ने हिंदी फिल्मों में प्रवेश किया है। अत:  मैंने उनसे इस संबध में जब प्रश्न किया तो वह मेरा आशय समझते हुए हंस कर (उत्तर देते हुए) बोले मिस्टर मैंने अपनी जवानी स्टेज को दे डाली, अब बुढ़ापा हिन्दी फिल्मों को दे रहा हूं, क्या कम है? मैंने तुरंत कहा नही हंगल साहब वह बात नही है बल्कि हमें इस बात का गौरव है कि आप जैसे अनुभवी कलाकार हमारी इंडस्ट्री में विद्यमान है।

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फिल्म पत्रकारों का कार्य श्रेष्ठ

फिल्म पत्रकार तथा उनके द्वारा की जाने वाली पत्रकारिता के संबंध मे मैंने एक सीधा सा प्रश्न उनके सामने रखा और जानना चाहा कि इस बारे आपके क्या विचार है इस पर ए.के. हंगल ने एक सिगरेट सुलगा ली और बड़े इतमिनान से कृतज्ञता का भाव-प्रदर्शित करते हुए बोले भई सच पूछा तो मैं प्रेस वालों का बड़ा शुक्रगुजार हूं, क्योंकि इन्हीं लोगों ने सबसे पहले मेरे काम की तारीफ लिखी और फिल्मी दुनिया में निर्माताओं निर्देशकों से मेरा परिचय कराया। फलस्वरूप सर्वप्रथम बासु चैटर्जी की फिल्म ‘सारा आकाश’ में मुझे एक भूमिका करने का ऑफर मिला और मैंने सहर्ष स्वीकार कर लिया। यदपि इससे पूर्व फिल्म शागिर्द मैं मैंने एक छोटी-सी भूमिका अवश्य की थी।

उल्लेखनीय फिल्में

मेरे काम को लोगों ने काफी पसंद किया और पिछले. पांच वर्षों में मैंने लगभग 35 फिल्मों में विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं निभाई हैं जो कि विशेष रूप से उल्लेखनीय है फिल्म ‘गुड्डी’ तथा ‘अभिमान’ में  (जया भादुड़ी के पिता की भूमिका) ‘तीसरी कसम’ (राज कपूर के पिता की भूमिका) ‘जवानी दीवानी’ (प्रिंसिपल साहब की भूमिका) अनुभव तथा आंधी में (एक वफादार नौकर की अदितीय भूमिका) तथा, ‘नमक हराम’ (एक ट्रेंड यूनियन के लीडर की भूमिका) तथा फिल्म  ‘आईना’ तथा ‘दीवार’ में एक गरीब बाप की भूमिका) इनके अतिरिक्त जिन अन्य फिल्मों में ए.के. हंगल ने संक्षिप्त किंतु महत्वपूर्ण भूमिकाएं अभिनीत की है उनमें ‘मुंबई रात की बांहो में’ ‘हीर रांझा’ ‘उमंग’ ‘परिचय’ ‘अनामिका’ ‘नादान’ ‘सात हिंदू’ ‘स्तानी’ ‘छुपा रुस्तम’ ‘हीरा पन्ना’ ‘जोशीला’ तथा ‘धरती कहे पुकार के’  के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। मैंने जब उनसे अपनी सबसे अच्छी फिल्म का नाम पूछा.. तो उन्होंने ‘गर्म हवा’ में स्व. बलराज साहनी के साथ ए.के. हंगल ने निश्चय ही एक ऐसी भूमिका की है जो कि वर्षो सिने दर्शकों द्वारा भुलाई न जा सकेगी। राष्ट्रीय एकता पर आधारित इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है।

आज हिंदी फिल्म जगत में ए.के. हंगल का नाम चोटी के चरित्र अभिनेताओँ में लिया जाता है और प्राय: सभी निर्माता निर्देशक उनकी बड़ी इज्जत करते हैं तथा अभिनय के क्षेत्र में उनकी सलाह को पूरा स्थान देते हैं। स्वभाव से हंसमुख तथा बातचीत में काफी अनुभवी हंगल अपने प्रशंसको का पूरा ध्यान रखते है और बड़ी आत्मीयता से मिलते है।

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आगामी फिल्मों की भूमिकाएं

चरित्र अभिनेता के रूप में प्रसिद्ध प्राप्त करने के बावजूद ए.के. हंगल ने अपने को टाइप्ड होने से बचाया है। फलस्वरूप अपनी आने वाली अनेक फिल्मों में वह दर्शकों के सम्मुख चोर, साधू किसान, शराबी, जूते वाला, तथा खलनायक के रूप मे भी दिखाई पड़ेगें।

निर्माता जी.पी सिप्पी की स्टीरियो फोनिक 70 एम. एम. फिल्म ‘शोले’ में ए.के. हंगल को एक शानदार बूढ़े खलीफा की भूमिका में सिने दर्शक शीघ्र ही देखेंगे विश्वामित्र आदिल द्वारा निर्देशित फिल्म ‘इंसपेक्टर ईगल’ में नयी तारीका नीलम-मेहरा के साथ उन्होंने एक शराबी की भूमिका की है। तथा पुन: बासु चटर्जी की आगामी फिल्म मंजिल में अमिताभ बच्चन तथा मौसमी चटर्जी के साथ उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। सुधेंदु राय की फिल्म ‘स्वीकार’ में भी ए. के. हंगल को एक चरित्र भूमिका के लिए सम्मिलित किया गया है। ऐसा उन्होंने बताया।

ऐसे मंजे हुए चरित्र अभिनेता से भेंट करने के पश्चात मुझे वास्तव में बड़ा आनंद मिला क्योंकि उनसे भविष्य में बड़ी आशाएं है।