‘‘निजी जिंदगी को लेकर कोई बात नहीं करना चाहती..’’ -इलियाना डिक्रूजा

दक्षिण भारत की 15 फिल्मों में अभिनय कर स्टार बनने के बाद बालीवुड में ‘‘बर्फी’’ जैसी संजीदा फिल्म से कैरियर की शुरुआत कर जबरदस्त शोहरत बटोरने वाली ईलीयाना डिक्रूजा की चौथी हिंदी फिल्म ‘‘हैप्पी एंडिंग’’ प्रदशित होने जा रही है. जिससे उन्हें काफी उम्मीदें हैं. इसमें उन्हें अपने पसंदीदा अभिनेता सैफ अली के साथ काम करने का मौका मिला है.

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आपने हिंदी फिल्मों में ‘बर्फी’ जैसी गंभीर फिल्म से कैरियर की शुरूआत की. उसके बाद कॉमेडी फिल्में करने लगी. यह सब क्या है?

-बालीवुड में कदम रखने से पहले मैं दक्षिण भारत की 16 फिल्में कर चुकी थी. उसके बाद मैं बालीवुड से जुड़ी. मगर सबसे बड़ा सच यह है कि हिंदी फिल्म ‘बर्फी’ में काम करने के लिए हामी भरने से पहले मैंने तीन माह तक सोचा था कि क्या किया जाए? पर इस फिल्म में एक कलाकार के तौर पर मुझे जो चुनौती नजर आयी, उसी वजह से मैंने काम किया. जबकि कॉमेडी ऐसा जॉनर है, जो हर किसी को पसंद आता है. हर इंसान की जिंदगी में कई तरह के तनाव होते हैं. इंसान अपने नजदीकी सिनेमा घर में जाकर कॉमेडी फिल्म देखकर तनाव मुक्त होना चाहता है. कलाकार के तौर पर मैं चाहती हूं कि लोग मेरी फिल्मों को देखें व मुस्कुराएं. आखिरकार एक कलाकार के तौर पर हमारा काम ऐसी फिल्में करना होता हैं, जिन्हें दर्शक देखना पसंद करें.

अब आपने ‘‘हैप्पी एंडिंग’’क्या सोच कर की?

-अब तक सैफ अली ने जितनी भी फिल्में बनायी हैं, वह सभी मुझे बहुत पसंद हैं. उनकी फिल्म मेकिंग की स्टाइल बहुत अलग तरह की है. सैफ अली बॉलीवुड फिल्में बनाते हैं, पर उसमें वेस्टर्न स्टाइल भी होती है. इसके अलावा सैफ अली के साथ काम करने की मेरी तमन्ना थी. तीसरी बात यह जिस जॉनर की फिल्म है, उस जॉनर की फिल्में देखना मुझे पसंद है. ऐसे जॉनर में काम करना पसंद है. दर्शक भी ऐसे जॉनर की फिल्में देखना पसंद करता है. तो जब मैं फिल्म की स्क्रिप्ट सुनने बैठी, तो इसी माइंड सेट के साथ बैठी थी. कहानी भी मुझे पसंद आयी और फिल्म में मेरा अपना किरदार भी मुझे बहुत पसंद आया.

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फिल्म ‘‘हैप्पी एंडिंग’’ के अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगी?

-इसमें रोमांटिक एंगल भी है. वह खुद रोमांटिक उपन्यास लिखती है. मगर खुद रोमांस में यकीन नहीं करती हैं. बहुत ही अलग तरह की इंडीपेंडेंट किरदार मैंने निभाया है. बहुत ज्यादा सोचती नहीं है. इस किरदार की जो चारीत्रिक विशेषता है, उसने भी मुझे प्रभावित किया.

जिस चीज को लिखना उसमें यकीन नहीं करना. यह डबल माइंड वाली बात है. तो डबल माइंड के किरदार को निभाना कितना आसान था?

-इस फिल्म में डबल माइंड कहीं से भी दिखाना नहीं था. बहुत ही सटीक अभिनय किया है. मेरे अनुसार राज डी के प्रतिभाशाली और समर्थवान निर्देशक हैं. उन्होंने बड़ी खूबी से मेरे अंदर से यह चरित्र निकलवाया है. उनके साथ काम करना मेरे लिए बहुत अच्छा अनुभव रहा. वह मेरी हर समस्या का समाधान करते थे.

लेकिन राज डी के की पिछली फिल्म ‘‘गे गोवा गॉन’’ बाक्स आफिस पर सुपर फ्लाप थी?

-मुझे तो लगता है कि फिल्म अच्छी बनी थी और चली भी थी. देखिए, हम कई बार उन फिल्मों में अभिनय करते हैं, जो कि सिर्फ दर्शकों के लिए होती हैं. उनमें हम अभिनय करते हुए हम संतुष्ट नहीं होते हैं. ऐसी फिल्में कई बार सफल हो जाती हैं कई बार कम सफल होती हैं. पर किसी फिल्म को करने में जो आत्मसंतुष्टि होती है, वह बहुत है.

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कुछ लोग सैफ अली को सीरियस और स्टाइलिश कलाकार मानते हैं आपने क्या पाया?

-वह स्टाइलिश हैं और कभी कभी सीरियस भी रहते हैं.पर उनका सेंस ऑफ हय्मर बहुत अच्छा है. वह सेट पर हमें इतना हंसाते थे कि कई बार सीन करना हमारे लिए मुश्किल हो जाता था.

गोविंदा के साथ काम करने के क्या अनुभव रहे?

-गोविंदा जी को डांस के साथ साथ कॉमेडी में भी माहिर माना जाता है. मगर इस फिल्म में उनके साथ मेरा एक भी सीन नहीं है. हॉ! हमने इस फिल्म में उनके साथ एक गाना किया है. और बहुत मजा आया. वह बड़े ही विनम्र कलाकार हैं. बहुत ही नेच्युरल हैं. यह गाना करते हुए मैं तो भूल गयी थी कि गोविंदा के साथ काम कर रही हूं. उन्होंने खुद कई सजेशन दिए. वह बहुत प्यारे कलाकार हैं.

आपने रणबीर कपूर, वरूण धवन और अब ‘‘हैप्पी एंडिंग’’ में सैफ अली के साथ काम किया है. अपनी उम्र से काफी बड़ी उम्र के हीरो के साथ काम करना आपके लिए कितना सहज रहा?

-मैं एक कलाकार हूँ. शूटिंग के वक्त कैमरे के सामने मुझे हर कलाकार पात्र के रूप में नजर आते हैं.

आप अपनी हम उम्र अभिनेत्रियों से प्रतिस्पर्धा को किस तरह लेती हैं?

-मैं किसी से कई प्रतिस्पर्धा नहीं कर रही हूं. मेरा मानना है कि हर अभिनेत्री की अपनी कुछ खासियत है. हर अभिनेत्री एक जैसा ही किरदार नहीं निभा सकती.आलिया व श्रृद्धा के मुकाबले मैं खुद को उम्र में बड़ी मानती हूं. मैं और आलिया भट्ट दोनों एक ही जिम में जाते हैं. पर यह दोनों अभिनेत्रियां अपने हिसाब से बेहतरीन काम कर रही है. पर मेरा स्तर इनसे अलग है. मैं वही काम कर सकती हूं, जो मुझे इंस्पॉयर करे. मैं कम्पटीशन की बात सोचती ही नही हॅूं.

आपकी जिंदगी में इन दिनों कौन है?

-इस सवाल का जवाब नहीं देना चाहती.क्योंकि मैं अपनी निजी जिंदगी को लेकर मीडिया में चर्चा करना पसंद नहीं करती.

किस तरह के किरदार करना चाहती हैं?

-‘बर्फी’ जैसी फिल्म भी करनी है.तो कमर्शियल फिल्म भी करनी है. जिसमें नाच गाना हो. आइटम नंबर भी करना है.ग्लैमरस रोल भी करने हैं.पर कोई ड्रीम रोल नही है.

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कलाकार के तौर पर सेटीशफेकशन..

-हमारे यहॉं एक सोच बनी हुई है.यदि आप सीरियस फिल्मों में काम करते हैं,तो लोग आपको अच्छी अभिनेत्री मानते हैं.पर मुझे ‘बर्फी’ जैसी फिल्में करने में ही ज्यादा आनंद मिलता है. बर्फी जैसी संजीदा फिल्म करना आसान नहीं होता.

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