मैं अपने गानो को सुन कर और परख कर अपनी गलतियों से सीखती हूँ- अलका याग्निक

जब बॉलीवुड के बेहतरीन गायिका अलका याग्निक व्हिस्लिंग वुड्स इंटरनेशनल के 5वे वेद सेशन में सम्मिलित होने पहुंची तो पूरा हॉल तालियों की आवाज़ से गूँज उठा और वही सुभाष घई ने उनकी ज़िन्दगी और उनके सफर के बारे में बात की। अलका का कहना था की उनकी माँ उनकी गुरु थी और उन्होंने ही उनकी प्रतिभा की खोज की और उनके माता पिता ने फिर उन्हें संगीत सीखने के लिए प्रोत्साहन दिया और उनके सफर में उनका साथ भी दिया। अलका ने बताया कि कैसे 4  साल की उम्र से ही वो अपने माँ के साथ बैठ कर लता मंगेशकर और आशा भोंसले के गाने सुनती थी जबकि उनकी उम्र के और बच्चे बहार खेलते थे। अलका ने अपनी कठिनाइयों के बारे में  बताया जो उनके सफर में आयी और छात्रों को गला खोलने के लिए कई तरीके भी बताये। अलका ने छात्रों को बताया, की “प्लेबैक सिंगिंग उतना आसान नहीं है जितना लगता है। आप एक किरदार के लिए गा रहे हो और आपको इस हिसाब से गाना है कि उस किरदार को उस पर अभिनय करने में मुश्किल ना हो। हर प्लेबैक गायक कि लिए भी ये एक बड़ी चुनौती होती है क्योंकि उसे हर संगीत निर्माता के अंदाज़ को अपनाना पड़ता है और वो करने के बाद कि ख़ुशी ही अलग होती है जब वो निर्माता आपको कहे कि आपने बड़ी खूबसूरती से गया है। सुभाष घई ने अलका कि तारीफ की और सबको उनके नक़्शे कदमो पर चलने कि सलाह दी। सेशन के अंत में अलका के कुछ गाने बजाये गए जहा उन्होंने उनसे जुड़े कुछ खास किस्से में सुनाये। उन्होंने बताया कि उन्हें तेज़ बुखार था जब उन्हें “एक दो तीन” गाना था और वो काम बहुत ही मुश्किल था लेकिन तब भी उन्होंने किया और वो चौंक गयी थी जब उन्हें उस गाने के लिए फिल्मफेर  अवार्ड दिया गया। उन्हें कई गानो के लिए फिल्मफेर मिला था जो वहा बजाये भी गए थे और अलका ने कई परदे के पीछे कि मज़ेदार बातें भी बताई । सेशन का अंत अलका याग्निक के सुरीली आवाज़ में गाये एक गाने से हुआ।

Subhash Ghai, Alka Yagnik
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 Alka Yagnik
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Alka Yagnik
 Alka Yagnik
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Subhash Ghai, Alka Yagnik
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Subhash Ghai
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