INTERVIEW: मुझे उन पर पूरा भरोसा है – श्रद्धा कपूर

शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा कपूर हमेशा किसी न किसी वजह से चर्चा में बनी रहती हैं। वह मशहूर संगीतज्ञ पंढरीनाथ कोल्हापुरे की नातिन हैं। इसलिए अभिनय के साथ साथ संगीत भी उनके खून में हैं। छः साल में लगभग ग्यारह फिल्मों में अभिनय करने के अलावा वह अब तक सात गीत फिल्मों में गा चुकी हैं। इन दिनों वह फिल्म ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ को लेकर काफी उत्साहित हैं।

आपकी पिछली फिल्म ओ के जानूक्यों नहीं चली?

इस सवाल का जवाब मुझे भी अब तक नहीं मिला। मैंने अपनी तरफ से पूरी मेहनत की थी। लोगों को मेरी परफॉर्मेंस पसंद आयी। शायद दर्शकों को कहानी में रोचकता नजर नहीं आयी। फिल्म नहीं चली, इस बात का मुझे अफसोस है। अब क्या कहूं, मेरी समझ में नहीं आ रहा है। लेकिन फिल्म ‘ओ के जानू’ के प्रदर्शन के बाद इसकी असफलता के बारे में सोचने या विश्लेषण करने का मुझे वक्त ही नहीं मिला। इसके बाद मैं दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गयी। मुझे भी अपने काम में व्यस्त रहना अच्छा लगता है। कहने के लिए मेरे पास ट्वीटर और इंस्टाग्राम के अकाउंट हैं। पर मैं सोशल मीडिया पर भी ज्यादा वक्त नहीं बिता पाती हूं। मैं एक साथ कई चीजों पर अपना ध्यान नहीं लगा पाती। मेरे लिए मेरी जिंदगी में तीन चीजें बहुत महत्व रखती हैं। पहला मेरा काम यानी कि फिल्में करना, दूसरा परिवार और तीसरा मेरे दोस्त।

फिल्म हाफ गर्लफ्रेंडकरने के लिए किस बात ने आपको इंस्पायर किया?

मोहित सूरी फिल्म ऑफर करें, तो मैं बिना सोचे हां कर देती हूं। मोहित सूरी के साथ मेरा जुड़ाव बहुत अलग है। मेरे लिए वह ऐसे निर्देशक हैं, जिनकी हर फिल्म मैं करना चाहती हूँ। इसलिए मैं उनसे कहानी सुनना भी जरूरी नहीं समझती। मुझे उन पर पूरा भरोसा है। मुझे यकीन है कि वह मेरी प्रतिभा को जाया नहीं करेंगे। इसलिए वह जो भी फिल्म मुझे ऑफर करते हैं,मैं वह फिल्म कर लेती हूं। मुझे अंदर से लगता है कि मैं मोहित सूरी के साथ जो भी फिल्म करूंगी, वह यादगार फिल्म रहेगी। वह हमेशा  मुझे अच्छे किरदार, अच्छी फिल्म ऑफर करते हैं। मैंने फिल्म साइन कर ली।

क्या आपने चेतन भगत के उपन्यास हाफ गर्ल फ्रेंडपढ़ा है?

मैं इस उपन्यास को पढ़ना चाहती थी। मगर फिल्म के निर्देशक मोहित सूरी ने मुझे पढ़ने के लिए मना किया। उनका कहना था कि उन्होंने पटकथा लिखते समय काफी बदलाव किए हैं। यदि उपन्यास पढ़ोगी, तो कन्फ्यूज हो जाओगी।

फिल्म हाफ गर्लफ्रेंडके अपने किरदार को लेकर क्या कहेंगी?

मैंने इस फिल्म में पहली बार एक दिल्ली की लड़की का किरदार निभाया है। रिया सोमानी दिल्ली की एक अमीर परिवार की लड़की है। पहली बार मैंने ऐसा किरदार निभाया है, जो मध्यमवर्गीय परिवार का नहीं है। वह कॉलेज में पढ़ती है। उसके पास सब कुछ है। कॉलेज की लोकप्रिय लड़की है। महंगे कपड़े पहनती है। लंबी बड़ी गाड़ी में घूमती है। बॉस्केटबाल की खिलाड़ी भी है। पूरी दुनिया को लगता है कि रिया सोमानी के पास सब कुछ है, उसकी जिंदगी में सिर्फ खुषी ही खुषी है। लेकिन रिया सोमानी के लिए जिंदगी में खुषी के मायने कुछ और हैं। मसलन, इस फिल्म में एक बारिश का गाना है। क्योंकि रिया सोमानी को पहली बारिश से खुशी मिलती है। उसे बारिष में भीगने से खुशी मिलती है। उसकी जिंदगी में यह छोटे छोटे पल बहुत महत्व रखते हैं। जब उसकी मुलाकात माधव झा से होती है, तो वह माधव झा की सादगी पर लट्टू हो जाती है। इससे अधिक किरदार या फिल्म के बारे में बताना उचित नहीं होगा।

आपने इस फिल्म के लिए बास्केटबॉल खेलने की कोई ट्रेनिंग हासिल की?

 हां! ट्रेनिंग तो लेनी ही पड़ी। यूँ तो स्कूल दिनों में मैं बास्केटबाल  खेलती थी, पर उस वक्त बास्केटबॉल इतना अच्छा नहीं खेलती थी। अब फिल्म में अभिनय करना था, तो सीखना जरूरी था। पर मुझे अर्जुन कपूर के मुकाबले कम सीखना पड़ा। मैंने 2-3 घंटे के 15 क्लासेस लिए हैं। पर बास्केटबॉल खेलने की शूटिंग करना बहुत चुनौतीपूर्ण था। दिल्ली में शूटिंग हो रही थी। मेरे लिए शारीरिक रूप से भी शूटिंग करना कठिन हो रहा था। क्योंकि यदि बॉस्केट में बॉल नहीं जाता था, तो रीटेक देना पड़ता था। अब हम प्रोफेशनल खिलाडी तो हैं नहीं, पर फिल्म में तो हमें प्रोफेशनल खिलाड़ी का ही अभिनय करना था, तो कई रीटेक होते थे। हम थक जाते थे। अभिनय एक ऐसा प्रोफेशन है, जहां अपने प्रोफेशन, अपने काम के साथ प्यार होना चाहिए, तभी हम इतनी मेहनत कर पाते हैं।

निजी जीवन में किन किन खेलों में रूचि है?

फुटबॉल व बॉस्केटबाल। पहले बॉस्केटबाल खेलना अच्छे से नहीं आता था। पर अब काफी अच्छा खेलने लगी हूं।

इस फिल्म में भाषा के टकराव को लेकर बात की गयी है। आप भाषा को लेकर क्या कहना चाहेंगी?

मेरी राय में प्यार की कोई भाषा नहीं होती है। प्यार यह नहीं देखता है कि आपको अंग्रेजी आती है या नहीं। पर जहां तक करियर का सवाल है, वहां भाषा बहुत महत्व रखती है। मैं हिंदी फिल्मों की अभिनेत्री हूं, तो मेरी हिंदी भाषा अच्छी होनी चाहिए। मुझे पता है कि मेरी हिंदी भाषा अच्छी नहीं है। पर मैं हमेशा भाषा सीखने की कोशिश करती हूं। मेरी कोशिश रहती है कि हर फिल्म के बाद मैं एक बेहतरीन अभिनेत्री बन जाऊं। इसीलिए मैं ज्यादा से ज्यादा बातचीत हिंदी में करती हूँ। हिंदी अखबार पढ़ती हूं, जिससे मेरी हिंदी भाषा सुधर जाए।

अर्जुन कपूर को लेकर क्या कहेंगी?

अर्जुन कपूर के साथ यह मेरी पहली फिल्म है। इस फिल्म में उन्होंने बहुत बेहतरीन परफार्मेंस दी है। मुझे लगता है कि लोग उनके काम को पसंद करेंगे। उन्होंने दिल से काम किया है। वह जिस तरह से सेट पर कठिन मेहनत करते थे, उसे देखकर मैं तो बहुत प्रभावित हुई।

फिल्म हसीनाकी क्या स्थिति है?

सिर्फ तीन दिन की शूटिंग बाकी है। पहली बार मैंने एक ग्रे शेड का किरदार इस फिल्म में निभाया है। उम्मीद करती हूं कि लोगों को मेरा यह रूप पसंद आएगा। इस फिल्म में मैंने पहली बार अपने भाई के साथ काम किया है। मैंने हसीना का किरदार निभाया है और मेरे भाई ने हसीना के भाई दाउद का किरदार निभाया है। जब भाई के साथ शूटिंग करनी थी, तब मैं नर्वस भी थी और उत्साहित भी थी। जिस दिन सेट पर हम लोग पहुंचे, तो हमें लगा कि हम घर पर ही शूटिंग कर रहे हैं।

आपको आपके भाई के साथ काम करते हुए आपके माता पिता ने देखकर क्या कहा?

फिल्म ‘हसीना’ के सेट पर एक दिन मेरी मां आयी थी। मुझे व मेरे भाई को एक साथ काम करते देख, वह बहुत भावुक हो गयी थीं। भाई के साथ काम करना मेरे लिए फायदेमंद रहा। क्योंकि वह मेरा हौसला बढ़ाया करता था।

इसके अलावा कौन सी फिल्म है?

– जी नहीं!!