ये जो दिल है एक अजीब सी मशीन है, ये  कब कैसे चलेगी ये इंसान को पता होता तो.. अली पीटर जॉन

वो रात बड़े बड़े सितारों और कामयाब दिग्गजो की रात थी, फिल्मफेअर  अवॉर्ड्स जिसमें सिर्फ नामी लोगो को बुलाया जाता था। अब्बास मुस्तान तब बड़े नामवाले नहीं हुए थे, तो जाहिर था की वो उस चमक धमकवाली रात में शामिल नहीं किये गए थे, लेकिन उनकी पहली बड़ी फिल्म बाज़ीगर के हीरो को जिसकी अभी पूरी एंट्री भी नहीं हुई थी उसको बुलाया गया था क्योंकि उसकी पहली बड़ी फिल्म बाज़ीगर की खूब धूम मची हुई थी। रात के 12 बजे जब बेस्ट न्यू कमर के नाम का एलान किया उस वक्त शाहरुख खान का नाम पुकारा गया और वो दौड़कर स्टेज पर चला गया और अपना अवॉर्ड लेकर आसमान के तरफ दिखाकर उसने कहा this is for you mother (ये अवॉर्ड आपके नाम है माँ) कहकर वो सीधा निकल पड़ा जबकि उस वक्त सारी मीडिया उसके पीछे भाग रही थी और फिल्मफेअर अवॉर्ड्स के आयोजको ने जीतने वालो के लिए एक शानदार पार्टी रखी हुई थी, वो रुका नहीं अपनी उस वक्त की छोटी सी गाडी में बैठकर वो सीधे मुम्बई मोहम्मद अली रोड पर पंहुचा जहां बाज़ीगर के निर्देशक अब्बास मुस्तान एक पुरानी चॉल में रहते थे वो कलाकार था शाहरुख खान उसको ये बताना था की उसको जो अवॉर्ड मिला था उसके लिए  अब्बास मुस्तान का बहुत बड़ा हाथ था और उन्होंने एक अजीब सी अपनी खुद की पार्टी मनाई मोहम्मद अली रोड के उस छोटे से घर में… mustan-,-abbas-,-shahrukh-khan
बाज़ीगर से पहले अब्बास मुस्तान को कोई बड़े नाम वाला जानता ही नहीं था क्योंकि उन्होंने उससे पहले सिर्फ कुछ गुजराती फिल्में की थी (गुजराती उनकी मातृ भाषा है) उससे पहले वो दोनों सुल्तान अहमद निर्देशक के असिस्टेंट थे और एडिटिंग में उनका नाम काफी हो चुका था लेकिन निर्देशक के नाम से जानने के लिए अभी उनको बहुत काम करना बाकी था बाज़ीगर भी एक ऐसी कहानी थी जिसको बनाने से काफी प्रोड्यूसर रिस्क लेना नहीं चाहते थे, लेकिन रतन जैन वीनस के उनको एक ऐसा प्रोड्यूसर मिला जिनको उनपर पूरा भरोसा आ गया था सिर्फ बाज़ीगर का स्क्रिप्ट सुनकर और उनका रिस्क कामयाब में बदल गया, शाहरुख एक बड़ा एक्टर माना गया और अब्बास मुस्तान का नाम अब लोग जानने लगे।
ये दो भाई थ्रिलर फिल्में बनाने में स्पेशलिस्ट थे और जैसे जैसे वो एक से बढ़कर बड़ी और कामयाब फिल्में बनाते गए उनका नाम और मशहूर होता गया और उनको बड़े निर्देशकों में माना जाने लगा। और क्यों न हो ? उन्होंने ऐसी ऐसी फिल्में बनायी जैसे सोल्जर, 36 चाइना टाउन, रेस, रेस 2, ऐतराज़, हमराज़ और कई और कामयाब और नए अंदाज़ की फिल्में। समीक्षकों ने बार बार देखा की ये अब्बास मुस्तान जो है ये भाई लोग हॉलीवुड की फिल्मो की नक्ल करते है। लेकिन अब्बास मुस्तान ने ये कर के दिखाया की हॉलीवुड की फिल्मों को लेकर कितने अच्छे तरीके से इंडियानॉयज़ किया जा सकता है। अभी वो उत्तम दर्जे के दिग्दर्शक हो चुके थे और वो अपने उस मोहम्मद अली रोड की चॉल को छोड़ने को तैयार नहीं थे।humraaz
बड़े बड़े स्टार और टेकनिशयंस को अगर उनको मिलना होता था तो उनको मोहम्मद अली रोड जाना पड़ता था और वो जाते थे क्योंकि अब अब्बास मुस्तान बड़े निर्देशक माने जाते थे। उनका फिल्मी दौर बड़े जोर से चल पड़ा और वो जो भी फिल्में बनाते थे वो अपने दम पर बनाते थे। अगर उनको पूरा भरोसा था तो वो सिर्फ अपने स्क्रिप्ट पर था जिस पर वो कई महीनो तक अपने लेखको के साथ अपने आशा कालोनी वाले दफ्तर में बैठकर लिखते थे, कहानी अगर कही से ले भी लेते थे, तो उसमें इतना चेंजेस लाते थे कि वो ओरिजिनल से बिलकुल अलग लगती थी।
मुझे कभी ये बात समझ में नहीं आयी जबकि मैं उनको पच्चीस साल से जानता हूँ और वो है उनका फिल्मों को बड़े स्टाइल से बनाना, नई नई जगहें दुनिया की, नई नई गाड़ियां, नए नए जहाज और हेलीकॉप्टर ये सब तो उनके लिए आम बात थी, वो तो हर फिल्म में कही और आगे बढ़ते जाते थे और जो इंडस्ट्री में बड़े बड़े निर्देशक थे वो इनका काम देखकर जलते भी थे और उनमें इन भाइयों के जैसा कुछ करने का जोश भी आता था, लेकिन बहुत काम निर्देशक इनके बताये हुए रास्ते पर चलने में कामयाब हुए। इन्होंने जब कपिल शर्मा को लेकर एक कॉमेडी फिल्म बनायी, किस किसको प्यार कंरू तो वो भी फिर कामयाब रही और उनको एक और टाइटल दिया गया, आल राउंडर का। abbas mustan Kapil-Mastans
लेकिन पिछले एक साल से वो जिस तरीके से काम कर रहे है ऐसा वो खुद मानते है की उन्होंने पहले कभी नहीं किया। वो तो दो और फिल्में बनाने का सोच रहे थे जिसमे से एक की कहानी अमिताभ बच्चन ने ओके भी की थी और एक फिल्म वो दीपिका पादुकोण को लेकर बनाना चाहते थे। लेकिन एक दिन उनके छोटे भाई हुसैन बर्मावाला जो उनकी सारी फिल्मो की एडिटिंग करते है उसमे अपने दोनों भाइयों को बताया की एक बड़ा जबरदस्त  हीरो घर पर ही है, भाई सोचते ही रह गए, फिर उन्हें पता चला किसकी बात कर रहा था। वो था अब्बास बर्मावाला का बेटा मुस्तफा जिसने अमेरिका से एक्टिंग और डायरेक्शन का कोर्स किया था। सब भाइयों ने बाकी काम छोड़कर ये फैसला किया की उनकी अगली फिल्म का हीरो मुस्तफा होगा।
फिर शुरू हुई एक ऐसी स्क्रिप्ट ढूंढने का जिसमें मुस्तफा सूट हो सकता था। फिर लेखको को बैठाया गया, फिर दुनिया भर की सैर की गयी और सही लोकेशन ढूंढने के लिए और सबसे पहले जो काम हुआ वो लोकेशन फिक्स करने का हुआ फैसला ये हुआ की पूरी फिल्म जॉर्जिया में एक ही शेड्यूल में किया जाएगा और फिर स्क्रिप्ट पर काम होते होते कुछ महीने लग गए और उतने में मुस्तफा की हीरोइन का भी सिलेक्शन हो गया, कियारा अडवाणी। फिल्म के नाम को लेके भी बहुत चर्चा हुयी एक भाई ने कहा मशीन, मुस्तफा की पहली फिल्म का नाम मशीन रखा।
मशीन नाम ऐसे ही नहीं रखा है अब्बास मुस्तान ने, जैसे मुस्तफा के अब्बा, अब्बास भाई कहते है ‘दिल कभी कभी मशीन के जैसे चलता है।’ अगर आपको सही नहीं लगता तो आप हमारी फिल्म देखिये और मुस्तफा का काम देखिये। उसने एक्शन, थ्रिल, डांस, कार रेसिंग, हैण्ड फाइट और बाकी बहुत कुछ किया है जो हम भी सोच नहीं सकते थे। अब हमारा काम पूरा हो गया है और हम लोगो को मुस्तफा पर पूरा भरोसा है। वो एक नई मशीन की तरह चलेगा ये हम लोगो के दिल से आवाज़ आती है।abbas-mustan
अभी 17 तारीख के लिए कुछ ही दिन बाकी रह गए है और मुस्तफा से बात करो तो उसके हर मस्ल में कॉन्फिडेंस झलकता है और उसके आँखों में एक नया तूफ़ान नज़र आता है। लेकिन उसका दिल कैसे चल रहा है यह किसी को नहीं पता क्योंकि उसका दिल एक अजीब सी मशीन बन गया आजकल…
अभी सारा खानदान मोहम्मद अली रोड छोड़कर लोखंडवाला आ गए है, लेकिन उनका दिल ही जो मशीन के तरह चलता है वो ये मानने को तैयार नहीं है की लोखंडवाला में उनका घर है, तो वही पर जहां उनका बचपन गुजरा है और जहां पर उनके फिल्मों में आने का शौक़ पहले पैदा हुआ था, और जहां से वो और मुस्तफा आज जहां पहँुचे है काम से कामयाबी पाने के लिए।